चंद्रपुर: महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले में स्थित जपतलई आश्रम शाला में सर्पदंश से तीन आदिवासी छात्राओं की दुखद मौत के बाद अब राज्य की सियासत गरमा गई है। इस हृदयविदारक घटना को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार और राज्य के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके आमने-सामने आ गए हैं। जहां विपक्ष ने सरकार पर आश्रम शालाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया, वहीं मंत्री ने वडेट्टीवार पर पलटवार करते हुए उन्हें ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
गड़चिरोली जिले के धानोरा तालुका अंतर्गत जपतलई स्थित अनुदानित आश्रम शाला में रात को सोते समय जहरीले सांप के काटने से तीन छात्राओं की जान चली गई। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्राथमिक कार्रवाई के तहत स्कूल प्रबंधन, मुख्याध्यापक और अधीक्षकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं तथा संबंधित आश्रम शाला की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विजय वडेट्टीवार का सरकार पर गंभीर आरोपकांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि, आश्रम शालाओं में दम तोड़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब आदिवासी परिवारों से आते हैं।सरकार आश्रम शालाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।बच्चों के लिए तय अनुदान और व्यवस्थाएं वर्षों से पर्याप्त नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें जानलेवा परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है।”
‘वडेट्टीवार खुद आश्रम शाला चलाते हैं’
वडेट्टीवार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने आक्रामक रुख अपनाया। मंत्री उईके ने पलटवार करते हुए कहा,”विजय वडेट्टीवार खुद भी आश्रम शालाएं चलाते हैं। इसलिए यह सवाल उन्हें खुद से पूछना चाहिए कि व्यवस्थाओं में कमी क्यों रहती है।” मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार विद्यार्थियों के लिए सभी जरूरी फंड मुहैया कराती है, लेकिन संस्था चालकों की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
‘अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?’
मंत्री के बयान पर विजय वडेट्टीवार ने दोबारा पलटवार करते हुए कहा कि आश्रम शालाओं की निगरानी और बच्चों की सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी शासन व संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होती है।उन्होंने सवाल उठाया कि,”सरकार ने केवल संस्था चालकों पर मुकदमे दर्ज किए, लेकिन उन लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई, जो इन स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने में विफल रहे?आश्रम शालाओं की बदहाली सुधारने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आदिवासी विकास विभाग का क्या एक्शन प्लान है?




























