समाचार सेवा; सुबोध बैस तिरोड़ा: उपजिला अस्पताल तिरोड़ा में जनता की स्वास्थ्य सेवाओं से सीधा संबंध रखने वाली एक्स-रे सेवा कई महीनों से ठप्प पड़ी है। पुरानी मशीन हटाकर केंद्र सरकार की ओर से नई एक्स-रे मशीन स्थापित की गई, लेकिन कंपनी की ओर से टेस्टिंग न होने के कारण अब तक यह मशीन शुरू नहीं हो पाई है। मशीन का उद्घाटन हो चुका है, परंतु उसका वास्तविक उपयोग शुरू न होने से मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार जनता की सेवा के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन तिरोड़ा अस्पताल की यह स्थिति उन दावों की पोल खोल रही है। स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर नागरिकों ने नाराजगी व्यक्त की है।
जनता की स्वास्थ्य सेवा के लिए सरकार कितने भी वादे करे, लेकिन तिरोड़ा उपजिला अस्पताल की हकीकत उन सभी घोषणाओं को झुठलाने वाली है। वर्षों से पुरानी और जर्जर एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा था, जिससे मरीजों और कर्मचारियों दोनों को कठिनाई होती थी। अंततः केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने नई मशीन मंजूर की और कुछ महीने पहले उसे स्थापित भी कर दिया गया। लेकिन आज तक वह मशीन चालू नहीं हुई, जिससे एक्स-रे विभाग पूरी तरह बंद पड़ा है।नई मशीन लगने की खुशी कुछ समय के लिए ही रही, क्योंकि कंपनी के ऑपरेटर द्वारा मशीन की टेस्टिंग न किए जाने से कामकाज रुक गया है। संबंधित कंपनी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के कारण जनता को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। रोजाना सैकड़ों मरीज एक्स-रे के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। कई मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां उनसे अधिक शुल्क लिया जाता है। गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक है।खास बात यह है कि इस नई मशीन का उद्घाटन कुछ महीनों पहले ही किया गया था। उस समय स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ उपस्थित थे। फीता काटने का समारोह हुआ, भाषण हुए, आश्वासन दिए गए — परंतु वास्तविक सेवा शुरू नहीं हुई। उद्घाटन केवल कैमरे के लिए हुआ और जनता के हित का कार्य कागजों तक ही सीमित रह गया।
अस्पताल के कर्मचारी भी असहाय महसूस कर रहे हैं। एक्स-रे विभाग में काम करने वाले कर्मचारी पूरे दिन खाली बैठे रहते हैं। उपकरण तैयार हैं, पर आदेश नहीं; मरीजों की भीड़ है, पर समाधान नहीं — ऐसी विचित्र स्थिति बन गई है।
स्थानीय नागरिकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। “सरकार केवल घोषणाएं करती है, लेकिन अमल में कुछ नहीं होता। स्वास्थ्य सेवा जनता का मूल अधिकार है, पर सरकार ने उसे केवल चुनावी वादों तक सीमित कर दिया है,” ऐसा नागरिकों का कहना है। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर तीव्र नाराजगी व्यक्त की है और जिला प्रशासन से तात्कालिक हस्तक्षेप कर मशीन को चालू करने की मांग की है।इस बीच, अस्पताल प्रशासन की ओर से हमेशा की तरह वही जवाब — “जल्द ही शुरू होगी।” लेकिन यह “जल्द” शब्द कई महीनों से सुनने को मिल रहा है। कंपनी की टेस्टिंग न होने का बहाना बनाकर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाली जा रही है। सरकारी अधिकारी इस स्थिति की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे जनता का रोष बढ़ रहा है।
सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े-बड़े सुधारों के दावे किए जाते हैं — आधुनिक उपकरण, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा, त्वरित जांच केंद्र जैसी घोषणाएं होती हैं। लेकिन तिरोड़ा उपजिला अस्पताल की सच्चाई बताती है कि सरकार के ये वादे केवल कागजों पर ही सीमित हैं। नई एक्स-रे मशीन लगाकर भी उसका परीक्षण और संचालन शुरू न करना न केवल लापरवाही है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य से सीधा मज़ाक है।
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प्रतिक्रिया:
“सरकार जनता की स्वास्थ्य सेवा के लिए बड़े दावे करती है, लेकिन वास्तविकता में तिरोड़ा अस्पताल की एक्स-रे मशीन महीनों से बंद है। नई मशीन लगने के बावजूद शुरू नहीं की गई — यह जनता के साथ सीधा विश्वासघात है। यदि आने वाले दिनों में यह मशीन चालू नहीं की गई तो हम जनता के साथ अस्पताल के बाहर तीव्र आंदोलन करेंगे।”
— पवन मोरे, कांग्रेस शहराध्यक्ष, तिरोड़ा

प्रतिक्रिया:
“पुरानी एक्स-रे मशीन हटाकर नई मशीन उस स्थान पर लगाई गई है। जब तक कंपनी का तकनीकी व्यक्ति आकर मशीन चालू नहीं करता, तब तक वह चालू नहीं हो सकती। हमने कंपनी से संपर्क किया है और उन्होंने पंद्रह दिनों के भीतर आकर मशीन शुरू करने की जानकारी दी है।”
— राहुल शेंडे, वैद्यकीय अधीक्षक, उपजिला अस्पताल, तिरोड़ा





























