भंडारा में बाघ का आतंक: 15 दिनों में 3 पर हमला, 2 की मौत; दहशत में ग्रामीण, बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा

भंडारा: महाराष्ट्र के भंडारा जिले के साकोली तहसील में इन दिनों बाघ का खौफ इस कदर फैला है कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं। पिछले 15 दिनों के भीतर बाघ ने तीन अलग-अलग हमलों में दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया है, जबकि एक महिला अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। इस घटनाक्रम ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है।
घटना का घटनाक्रम: एक के बाद एक तीन हमले
नवेगांव-नागझिरा बाघ अभयारण्य से सटे गांवों में जंगली जानवरों की आहट आम थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में बाघ आक्रामक हो गया है:
  • 19 मार्च: बांपेवाडा निवासी वसंत मेश्राम महुआ इकट्ठा करने खेत गए थे, जहाँ बाघ ने उन पर हमला कर उन्हें मार डाला।
  • 27 मार्च: उमरझरी की माया सोनवणे पर बाघ ने हमला किया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ भागा, लेकिन माया बुरी तरह घायल हो गईं। इलाज के दौरान नागपुर में उनकी मृत्यु हो गई।
  • तीसरी घटना: आमगांव में छाया मुंगमोडे नामक महिला पर भी बाघ ने हमला किया। फिलहाल उनकी हालत गंभीर है और नागपुर में उपचार जारी है।
खौफ के साये में ग्रामीण और ठप हुई पढ़ाई
बांपेवाडा, उमरझरी और आमगांव ये तीनों गांव 5 किलोमीटर के दायरे में हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण किसानों ने खेतों में जाना बंद कर दिया है। सबसे बुरा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। उमरझरी के बच्चे पढ़ाई के लिए 2 किलोमीटर दूर बांपेवाडा गांव जाते थे, लेकिन सुरक्षा के डर से माता-पिता ने उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और
वन विभाग की कार्रवाई: 180 कर्मचारी और ड्रोन तैनात
ग्रामीणों के आक्रोश के बीच वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एसीएफ शोएब अश्फाक रिझवी (नवेगांव-नागझिरा बाघ अभयारण्य) के अनुसार, विभाग निम्नलिखित कदम उठा रहा है,
  • निगरानी: 46 कैमरा ट्रैप और 4 ड्रोन कैमरों से बाघ की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
  • गस्त: 180 कर्मचारियों की टीम लगातार जंगल में गस्त कर रही है।
  • चुनौती: जंगल काफी घना होने और बाघ द्वारा लगातार स्थान बदलने के कारण उसे पकड़ने में देरी हो रही है।
  • तैयारी: शूटरों की टीम तैनात है, जो बाघ को देखते ही उसे ‘डार्ट’ (बेहोश) कर पिंजरे में कैद करने की कोशिश करेगी।
नागरिकों की आवाज
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे हर पल डर के साये में जी रहे हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता नेपाल रंगारी ने वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठाते हुए तत्काल सुरक्षा की मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 3 दिनों के भीतर बाघ को पकड़ा नहीं गया, तो ग्रामीण वन विभाग की चौकियों पर कब्जा कर उग्र आंदोलन करेंगे।
Raksha Times
Author: Raksha Times

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