गपुर: नागपुर शहर की बदहाल सीमेंट सड़कों को लेकर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने शहर की सीमेंट रोड से जुड़ी सभी शिकायतों का तत्काल निराकरण कर 8 जून तक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक निर्माण विभाग, एनएचएआई, मनपा और नागपुर सुधार प्रन्यास को फटकार भी लगाई है।
नागपुर में सीमेंट सड़कों की खराब गुणवत्ता और नागरिकों की बढ़ती परेशानियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने संबंधित विभागों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि शहर में सीमेंट रोड निर्माण से जुड़ी सभी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाए और 8 जून तक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।
जनमंच सामाजिक संस्था की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि शहर में कई जगहों पर सीमेंट रोड की ऊंचाई जरूरत से ज्यादा बढ़ा दी गई है, जिसके कारण बारिश का पानी सीधे लोगों के घरों में घुस रहा है। वहीं पुरानी डामर सड़क हटाए बिना उसके ऊपर ही कंक्रीट डालने से सड़कें कुछ ही समय में दरकने लगी हैं। कई स्थानों पर सड़कें टूट चुकी हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। पेवर ब्लॉक कमजोर गुणवत्ता के होने के कारण टूट रहे हैं और नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। साथ ही सीमेंट रोड निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों की भी अनदेखी की गई, जिससे धूल प्रदूषण बढ़ रहा है।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि ड्रेनेज और पाइपलाइन की समुचित योजना के बिना सड़क निर्माण किया गया। नतीजतन नई बनी सड़कों को बार-बार पाइपलाइन और अन्य कामों के लिए खोदा जा रहा है, जिससे करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को राहत नहीं मिल पा रही। कोर्ट ने इन सभी मामलों को गंभीर मानते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, मनपा और नागपुर सुधार प्रन्यास को तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।




























