घर में पिता की अर्थी, आंखों में आंसुओं का सैलाब… फिर भी पिता का सपना पूरा करने परीक्षा केंद्र पहुंची बेटी!

भंडारा: “हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख…” महाराष्ट्र के तुमसर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। एक तरफ घर के आंगन में पिता का पार्थिव शरीर रखा था, कोहराम मचा था, हर आंख नम थी… लेकिन दूसरी तरफ एक बेटी अपने भविष्य की जंग लड़ने परीक्षा केंद्र की ओर बढ़ रही थी। हम बात कर रहे हैं जान्हवी राहांगडाले की, जिसने पिता के साये के उठ जाने के चंद घंटों बाद, अपने आंसुओं को पीकर 12वीं का अंग्रेजी का पेपर दिया। जान्हवी का यह साहस आज पूरे महाराष्ट्र के लिए चर्चा का विषय बन गया है।
नियति का खेल भी कितना क्रूर होता है, इसका अहसास तुमसर तहसील के आंबागड में रहने वाली जान्हवी को सोमवार को हुआ। जान्हवी के पिता हौशीलाल राहांगडाले (51) साइकिल से घर लौट रहे थे, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से वे गिर पड़े। सिर पर लगी गंभीर चोट ने उनके जीवन की डोर काट दी। घर का इकलौता आधार स्तंभ ढह गया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सोमवार की दोपहर पिता की मौत हुई और ठीक अगले दिन मंगलवार, 10 फरवरी को जान्हवी की जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा थी। बारावी बोर्ड का पहला पेपर। घर में पिता की अर्थी सजी थी, मां और सगे-संबंधियों के रुदन से आसमान फट रहा था। ऐसे में किसी का भी टूट जाना स्वाभाविक था, लेकिन जान्हवी ने अपने पिता को दी गई जुबान याद की। उसने तय किया कि वह अपने पिता का सपना अधूरा नहीं छोड़ेगी।
भारी मन और डबडबाई आंखों के साथ, जान्हवी सुबह ठीक 10 बजे अपने भाई के साथ ‘जनता विद्यालय एवं कनिष्ठ महाविद्यालय’ पहुंची। जिस हाथ को पिता की अंतिम विदाई में शामिल होना था, उस हाथ ने कांपते हुए पेन पकड़ा और अंग्रेजी का पेपर लिखना शुरू किया। परीक्षा हॉल में मौजूद हर शख्स की आंखें यह मंजर देख नम थीं। जान्हवी ने न केवल पेपर दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि पिता के दिए संस्कार और उनकी उम्मीदें किसी भी दुख से बड़ी होती हैं।
पेपर खत्म करने के बाद जान्हवी घर लौटी और फिर अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुई। जान्हवी का यह अटूट धैर्य और साहस आज उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक मिसाल है, जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं। पिता चले गए, लेकिन उनकी बेटी ने उनकी यादों और सपनों को अपने हौसलों की उड़ान दे दी है।
Raksha Times
Author: Raksha Times

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