नागपुर: नागपुर महानगरपालिका चुनाव के बाद अब सत्ता पक्ष में अहम जिम्मेदारियों को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। भाजपा के विजयी पार्षदों के गुट पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होते ही सत्तापक्ष नेता और विभिन्न समितियों के प्रमुखों के नामों पर अंतिम मुहर लगने जा रही है। 27 जनवरी को यह तस्वीर साफ़ हो जाएगी कि सत्ता की कमान किसके हाथ जाएगी।
नागपुर महानगरपालिका चुनाव में विजयी भाजपा के 102 पार्षदों का अलग-अलग गुट पंजीकरण मंगलवार, 27 जनवरी को विभागीय आयुक्त के समक्ष पूरा होगा। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि मनपा में सत्तापक्ष नेता की जिम्मेदारी किस पार्षद को सौंपी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मंगलवार को नागपुर में मौजूद रहने की संभावना है, ऐसे में महापौर के साथ-साथ सत्तापक्ष नेता, स्थायी समिति अध्यक्ष और परिवहन समिति सभापति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी नामों की घोषणा संभव है।
मनपा में सत्तापक्ष नेता का पद बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि सदन के संचालन और पार्टी पार्षदों के समन्वय की जिम्मेदारी इसी पद पर होती है। इस पद के लिए संजय बालबांडे, वीरेंद्र कुकरेजा, दिलीप दिवे, प्रदीप पोहाणे, बाल्या बोरेकर, जितेंद्र कुकडे, विजय झलके और दिव्या धुरडे जैसे नाम चर्चा में हैं।
वहीं परिवहन समिति को अलग बजट मिलने के कारण इसे भी महत्वपूर्ण समिति माना जा रहा है। समिति के सभापति पद के लिए कई पार्षदों ने दावेदारी पेश की है, हालांकि अंतिम फैसला 27 जनवरी के बाद ही स्पष्ट होने की संभावना है।
इधर विपक्ष की ओर से भी नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर मंथन जारी है। कांग्रेस की तरफ से संजय महाकालकर और दीपक पटेल के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। 34 निर्वाचित पार्षदों में से अधिकतर नए चेहरे होने के कारण अनुभव को देखते हुए वरिष्ठ पार्षद को विपक्ष की कमान सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है।





























