गिनीज़ बुक में नाम दर्ज करने का लक्ष्य – आईटीआई तिरोडा के तत्वावधान में भव्य आयोजन
संवाददाता – सुबोध बैस
(विशेष प्रतिनिधि, तिरोडा)
तिरोडा : तिरोडा का आसमान आज देशभक्ति की तरंगों से गूंज उठा जब हजारों विद्यार्थियों ने एक स्वर में “वंदे मातरम्” का गायन किया। शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आई.टी.आई.), तिरोडा के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक सामूहिक राष्ट्रगीत गायन कार्यक्रम ने नगर के वातावरण को राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत कर दिया।यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति आस्था और एकता का जीवंत प्रतीक बन गया। प्रातः ठीक ९:५० बजे, देशभर में एक ही समय पर सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” के गायन के माध्यम से गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त करने का प्रयास किया गया।कार्यक्रम में तिरोडा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों एवं कनिष्ठ महाविद्यालयों के लगभग तीन हजार विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन सभी ने एक स्वर में राष्ट्रगीत गाते हुए सम्पूर्ण परिसर को देशभक्ति के अद्भुत आलोक से आलोकित कर दिया। मंच के चारों ओर लहराते तिरंगे और विद्यार्थियों की ऊर्जावान उपस्थिति ने माहौल को और भी पावन बना दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री संजीव कोलते ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री अनुप बोपचे, शिक्षण संस्था प्रमुख, तिरोडा उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथियों में मा. तहसीलदार श्री एन. एम. ठाकरे, मा. बी.डी.ओ. सौ. संघमित्रा कोल्हे, मा. ठाणेदार श्री ए. बी. वानखेडे, मा. आर.एफ.ओ. श्री आर. एस. भगत, तथा संस्था के प्रभारी प्राचार्य श्री जी. के. पटले विशेष रूप से उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त पत्रकार संघ के अध्यक्ष मा. जैस्वाल जी, सि. जे. पटेल महाविद्यालय के प्राचार्य शर्मा जी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं नागरिकों ने इस देशभक्ति के पर्व में सहभागिता निभाई।कार्यक्रम का संचालन श्री अक्षय गजभिये, शिल्प निदेशक, आईटीआई तिरोडा ने सटीक व प्रभावशाली ढंग से किया।
अंत में श्री वी. जी. मुसळे, शिल्प निदेशक ने अपनी साहित्यिक शैली में आभार प्रदर्शन करते हुए सभी सहभागी संस्थाओं, अतिथियों, विद्यार्थियों, पत्रकार बंधुओं एवं प्रशासनिक विभागों का हृदय से अभिनंदन किया।
प्रेरणादायी उद्बोधन – राष्ट्रभावना से ओतप्रोत
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री बालकृष्ण बिसेन ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में “वंदे मातरम्” की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।उन्होंने विद्यार्थियों में राष्ट्रसेवा, अनुशासन, स्वावलंबन और नवभारत निर्माण के प्रति जागरूकता का संचार किया।
उन्होंने कहा – “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारे अस्तित्व, हमारी मिट्टी और हमारी मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम का प्रतीक है।”संस्था के प्रभारी प्राचार्य श्री जी. के. पटले ने अपने प्रास्ताविक भाषण में “वंदे मातरम्” के स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई भूमिका का उल्लेख करते हुए युवाओं को राष्ट्रहित में योगदान देने का आह्वान किया।अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री संजीव कोलते ने साहित्यिक जोश और राष्ट्रीय गौरव का समन्वय करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने वाले सांस्कृतिक उत्सव हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा प्रदान करते हैं।

सुव्यवस्थित प्रबंधन – सुरक्षा और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण
इस कार्यक्रम की सफलता में ग्रामीण रुग्णालय तिरोडा द्वारा चिकित्सा सुविधा की तत्पर व्यवस्था, नगर परिषद तिरोडा द्वारा मैदान की स्वच्छता, पेयजल व अग्निशमन व्यवस्था ने आयोजन को और भी सुव्यवस्थित बनाया।
एनसीसी कैडेट्स, आईटीआई स्वयंसेवक, तथा शहीद मिश्र विद्यालय के शिक्षकवृंद और कर्मचारियों ने समर्पण के साथ अपनी भूमिका निभाई।
देशभक्ति, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक
“वंदे मातरम्” का यह सामूहिक गायन न केवल एक रिकॉर्ड बनाने का प्रयास था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय चेतना का अद्भुत प्रदर्शन था। तिरोडा नगर ने इस अवसर पर यह सिद्ध किया कि जब संकल्प एक हो और भावनाएँ राष्ट्र के प्रति समर्पित हों, तब कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर रहेगा — जो हमें यह सिखाता है कि देशप्रेम का सबसे सशक्त स्वर, “वंदे मातरम्” ही है।
























