रनवे विस्तार मंज़ूरी के बाद अकोला में राजनीतिक विवाद तेज, कांग्रेस-भाजपा में श्रेय को लेकर विवाद, नेताओं में बयानबाजी शुरू

अकोला: पश्चिमी विदर्भ में हवाई यातायात के लिए मील का पत्थर माने जाने वाले अकोला स्थित शिवनी हवाई अड्डे के रनवे के विस्तार का काम जल्द ही शुरू होने वाला है। राज्य सरकार की शक्ति प्रदाता समिति ने रनवे के विस्तार के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण निधि को मंजूरी दे दी है। लेकिन इस मंजूरी के बाद, अकोला में कांग्रेस और भाजपा के बीच श्रेय लेने को लेकर नया विवाद छिड़ गया है।

अकोला स्थित शिवनी हवाई अड्डे के रनवे विस्तार को लेकर पश्चिमी विदर्भ में नई हलचल है। राज्य सरकार की शक्ति प्रदाता समिति ने रनवे के विस्तार के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण हेतु 208.76 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दे दी है। 1943 में बने इस हवाई अड्डे का 1400 मीटर लंबा रनवे अब 1800 मीटर किया जाएगा।

विस्तार के लिए पहले डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की कुल 60.68 हेक्टेयर जमीन हवाई अड्डा प्राधिकरण को दी गई थी, लेकिन अब 22.24 हेक्टेयर निजी जमीन की और जरूरत है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बिना इस जमीन के हवाई अड्डे का विकास संभव नहीं है।

अकोला में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस मंजूरी का श्रेय लेने को तैयार हैं। कांग्रेस विधायक साजिद खान का कहना है कि उन्होंने सरकार पर लगातार दबाव बनाया, जबकि भाजपा नेता विजय अग्रवाल का दावा है कि यह मुख्यमंत्री और अधिकारियों की सक्रियता का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, उद्योग, सिंचाई का लंबित कार्य दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। हवाई अड्डे के विस्तार का मुद्दा कई वर्षों से लंबित है। विस्तार को लेकर स्थानीय प्रशासन-सरकार स्तर पर बैठकें हुईं। विधानमंडल के कई सत्रों में जनप्रतिनिधियों ने भी चर्चा की। कुछ ने सवाल भी उठाए। फिर भी, यह मसला अभी तक सुलझा नहीं। भले ही वित्तीय मंज़ूरी मिल गई हो और किसी ने श्रेय न लिया हो, अकोलकर की आम भावना यही है कि हवाई अड्डा तुरंत बनना चाहिए।

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Author: Raksha Times

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