नागरिक बोले – “फोन लगता है पर आवाज नहीं आती!” शिकायतों पर ठोस कार्रवाई का अभाव; केंद्र सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
तालुका प्रतिनिधि : सुबोध बैस तिरोड़ा : शहर में बीएसएनएल की दूरसंचार सेवा पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे नागरिकों में गहरी नाराज़गी व्याप्त है। फोन न लगना, कॉल के दौरान आवाज़ न सुनाई देना और इंटरनेट सेवा बाधित रहना – इन समस्याओं ने लोगों को बेहद परेशान कर दिया है। केंद्र सरकार की एक महत्त्वपूर्ण सेवा होने के बावजूद संबंधित विभाग की उदासीनता साफ दिखाई दे रही है। आज के डिजिटल युग में जब मोबाइल नेटवर्क का उपयोग शैक्षणिक कार्यों, ऑनलाइन लेन-देन और सरकारी योजनाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है, तब बीएसएनएल की निष्क्रियता के कारण तिरोड़ा क्षेत्र के नागरिकों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतें दर्ज होने के बावजूद बीएसएनएल अधिकारियों की चुप्पी से लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।तिरोड़ा शहर और आसपास के क्षेत्रों में बीएसएनएल नेटवर्क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। नागरिकों का कहना है कि फोन कॉल नहीं लगते, कभी आवाज़ नहीं आती या बीच में कॉल कट जाती है, वहीं इंटरनेट सेवा तो लगभग पूरी तरह बंद है। इस कारण दैनिक जीवन और कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है। यह सेवा केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आती है, फिर भी इसकी उपेक्षा की जा रही है, ऐसा नागरिकों का आरोप है।आज के डिजिटल भारत में मोबाइल नेटवर्क हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है — संवाद, शिक्षा, ऑनलाइन लेन-देन, सरकारी योजना या स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच – सब कुछ नेटवर्क पर निर्भर है। लेकिन तिरोड़ा में बीएसएनएल के उपभोक्ता इस आवश्यक सेवा से वंचित हैं। पिछले कई महीनों से नेटवर्क की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, और बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ है।
नागरिकों के अनुसार, मोबाइल में नेटवर्क सिग्नल तो दिखाई देता है लेकिन कॉल कनेक्ट होने के बाद आवाज़ सुनाई नहीं देती या कॉल अपने आप कट जाता है। कई बार तो फोन कॉल लगता ही नहीं, और इंटरनेट की स्थिति सबसे खराब है। “नेटवर्क है, पर सेवा नहीं!” – यही शिकायत अधिकतर उपभोक्ताओं की है।बीएसएनएल, जो कि केंद्र सरकार की संस्था है, का दायित्व है कि वह ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सस्ती और भरोसेमंद सेवा प्रदान करे। किंतु तिरोड़ा में इस संस्था की निष्क्रियता से नागरिकों का विश्वास डगमगा रहा है। नियमित रूप से सेवा शुल्क देने के बावजूद नेटवर्क न मिलने से उपभोक्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। “अगर अधिकारी खुद नेटवर्क की जांच करें तो उन्हें नागरिकों की वास्तविक परेशानी का अंदाजा होगा,” एक उपभोक्ता ने कहा। कुछ नागरिकों ने इस समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की तैयारी भी शुरू कर दी है।बीएसएनएल जैसी केंद्र सरकार की महत्त्वपूर्ण सेवा का तिरोड़ा में ठप पड़ना अत्यंत चिंताजनक है। जब केंद्र सरकार “डिजिटल भारत” की बातें कर रही है, तब ग्रामीण और छोटे शहरों में यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। इसका सीधा असर नागरिकों के जीवन, उनके कार्यों और शिक्षा पर पड़ रहा है। अधिकारियों को केवल शिकायतें सुनने के बजाय तत्काल तकनीकी कदम उठाने होंगे। जनता का विश्वास फिर से अर्जित करना है तो बीएसएनएल को अब कार्रवाई दिखानी ही होगी।
























